Home अजब-गज़ब Dinu की कुल्हाड़ी Short Motivational Story

Dinu की कुल्हाड़ी Short Motivational Story

Dinu की कुल्हाड़ी Short Motivational Story

Dinu की कुल्हाड़ी Short Motivational Story
Dinu की कुल्हाड़ी Short Motivational Stor

एक छोटे से गाँव में दिनु (Dinu)नाम का गरीब लड़का रहता था। दिनु पढ़ा लिखा नहीं था इस लिए छोटी-मोटी मजदूरी और अन्य काम-काज कर के अपना पेट पालता था। समय बीतने लगा। मंदी के कारण कुछ ही समय में दिनु को काम मिलना पूरी तरह से बंद हो गया। अब दिनु गाँव छोड़ने को मजबूर हो जाता है। दिनु (Dinu) रास्ते में भूखा-प्यासा चला जा रहा होता है। तभी उसकी नज़र एक लकड़ी के व्यापारी की दुकान पर जाती है। दिनु वहाँ जा कर सेठजी से हाथ जोड़ कर काम देने की बिनती करता है। उस दुकान के मालिक को दिनु की हालत पर रहम आ जाता है तो वह उसे खाना खिला देते हैं और उसे लकड़ी काटने का अस्थायी काम भी दे देते हैं। नयी नौकरी पा कर दिनु (Dinu) काफी उत्साह में आ जाता है। वह कुल्हाड़ी ले कर पैड की लकड़ी काटने के काम में लग जाता है। दिनु की काम के प्रति लगन देख कर शेठजी भी काफी खुश हो जाते हैं। दिनु पहले ही दिन को शाम तक 20 पैड की लकड़ी काट लेता है। इस बात से खुश हो कर सेठजी दिनु (Dinu) को पक्की नौकरी दे देते हैं। दिनु भी प्रति दिन दिल लगा कर ईमानदारी से काम करने का वचन देता है। हर बार और अच्छा काम कर के देने का वादा करता है।

दूसरे दिन सुबह सुबह दिनु (Dinu) लकड़ी काटने के काम मे लग जाता है। काम करते करते शाम हो जाती है। जब दिनु गिनती करता है तो, पाता है की वह उस दिन सिर्फ 18 ही पैड की लकड़ियाँ काट पाया था।

दिनु सोचता है की,,, शायद उसने आज… पहले दिन जितनी महेनत नहीं की होगी। वह इस निश्चय के साथ सो जाता है की अगले दिन अधिक श्रम कर के और लकड़ियाँ काट लूँगा।

तीसरे दिन दिनु 1 घंटा जल्दी काम पर निकल जाता है और देर रात तक लकड़ियाँ काटता रहता है। अंत में जब दिनु गिनती करने लगता है तो काफी दुखी हो जाता है, वह पता है की अधिक महेनत करने पर भी वह सिर्फ 16 पैड की लकड़ियाँ ही काट पाया था।

चौथे दिन दिनु (Dinu) और ज़ोर लगा कर काम करता है, पर उसे परिणाम फिर से कम ही मिलता है, इस बार वह सिर्फ 14 पैड की लकड़ियाँ ही काट पाया था। दिनु इस अजीब घटना से उदास हो जाता है और दुकान के मालिक (सेठजी) के पास जाता है।

दिनु सेठजी से कहता है की, आप मुझे काम से निकाल दीजिये मालिक, मै किसी काम का नहीं हूँ, दिन प्रति दिन मेरे काम करने की क्षमता कम ही होती जा रही है। मै आप की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहा हूँ, उसी बात का गम मुझे परेशान किए जा रहा है।

दुकान के मालिक दिन की इस बात को सुन कर,,, उस के सिर पर हाथ रख कर उसे समजाते हैं की तुम प्रयास तो कर ही रहे हो, और पहले दिन से अधिक प्रयास कर रहे हो, लेकिन क्या तुमने अपनी कुल्हाड़ी की धार पर ध्यान दिया?

उन्होने दिनु से कहा की,,, बेटा परिश्रम करना बड़ी अच्छी बात है, पर सही दिशा में, सही समय, पर और सही संसाधनों के साथ महेनत करने पर उत्तम फल प्राप्त होता है। मै दूसरे दिन से ही जानता था की तुम्हें कुल्हाड़ी की धार तेज़ करने की ज़रूरत है, पर अगर दूसरे ही दिन यह बात तुम्हें बता देता तो जीवन की यह अमूल्य सीख तुम्हें कभी प्राप्त नहीं हो पाती। इसी लिए बेटा उदासी का त्याग करो, अपनी कुल्हाड़ी की धार तेज़ कर लो, और फिर परिणाम देखो।

दिनु नें तुरंत सेठजी की समझायी हुई बात पर अमल किया, और अगले दिन समय पर काम पर लग गया। शाम तक काम करने के बाद दिनु (Dinu) नें गिनती की तो पाया की,,,, वह 25 पैडों की लकड़ी काट चुका था। कहानी के पात्र दिनु (Dinu) नें तो अपना सबक सीख लिया पर क्या आप ने सीखा ?

सार – सफलता पाने के लिए महेनत करना परम आवश्यक है, पर सही दिशा में, उपयुक्त संसाधनों के साथ सही समय पर महेनत करने से मन चाहा परिणाम प्राप्त होता है। कुल्हाड़ी की धार तो सिर्फ एक उदाहरण है । यह बात सभी क्षेत्रो में काम करने वाले व्यक्तियों को लागू होती है। समय समय पर अपना ज्ञान और काम काज करने की तकनीक को बहेतर बनाते रहने से ही सही परिणाम मिलते है। आशा है वाचक मित्रों आप को इस कहानी से उपयोगी सीख मिली होगी – धन्यवाद