दीपावली, ग्वालियर डायरीज: 4 नवंबर के दिन इस बार दीपोत्सव का त्यौहार मनाया जायेगा, दीपावली त्यौहार में देवी महालक्ष्मी का पूजा करने का विशेष परंपरा सदियों से चली आ रहे है।
आखिर क्यों करते है देवी महालक्ष्मी की पूजा ?
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- अगर पुराणों (भागवत और विष्णुधर्मोत्तर) की माने तो इसी दिन देवी लक्ष्मी समुद्र मंथन के दोरान प्रकट हुई थी।
- रामायण (वाल्मीकि) की माने तो इसी दिन भगवान राम और देवी सीता का विवाह हुआ था।
- रामायण की ओर कथा के अनुसार इसी दिन भगवान राम और देवी सीता , लक्ष्मण जी के साथ वनवास काट के वापस अयोध्या आए थे, और अयोध्या वाशियो ने उनके स्वागत के लिए भव्य दीपोत्सव आयोजित की थी।
- अन्य पुराणों (स्कंद और पद्म ) में यह कहां गया है की इस दिन अगर आप दीप दान करते है तो आप अपने पापों से भी मुक्त हो जाते है।
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पूजा की प्राचीन विधि
- इसी दिन आप देवी लक्ष्मी की पूजा करते है।
- देवी लक्ष्मी की पूजा से पहले श्रीगणेश, भगवान विष्णु, देवी सरस्वती, देवराज इंद्र, तथा कुबेर की पूजा का प्रावधान है।
- ज्योतिषियों की माने तो इस बार चतुर्ग्रही योग बना हुआ है, इसलिए अगर सच्चे हृदय पूजा की जाए सारे कामने पूरा होंगे।
पूजा का समय:


पूजा की विधि:
पहले खुद को शुद्ध कर ले इसके लिए आप कुशा या पुष्पादि से तीन बार जल का छिड़काव अवश्य करे, ध्यान रखे की जल का छिड़काव करते वक्त आप पवित्र मंत्र का जरूर जाप करे।
मंत्र: ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपि वा। यःस्मरेत् पुण्डरीकाक्षं सबाह्याभ्यंतर: शुचिः।।
उसके बाद अपने हाथ जोड़े और नीचे दिए गए मंत्र का जाप करे
ॐ केशवाय नमः, ॐ माधवाय नम:, ॐनारायणाय नमः ऊँ ऋषिकेशाय नम:

विशेष: जब भी आप रोली पहना रहे हो या फिर टीका लगा रहे हो तब नीचे दिए गए मंत्र अवश्य पढ़े:
चन्दनस्य महत्पुण्यम् पवित्रं पापनाशनम्
आपदां हरते नित्यम् लक्ष्मी तिष्ठतु सर्वदा।
लक्ष्मी जी की आरती













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