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बड़ी संख्या में MBBS डॉक्टर और नर्सो की कमी

ग्वालियर न्यूज, ग्वालियर डायरीज: कोरोना काल में अगर सबसे ज्यादा किसी ने योगदान दिया है तो वो है देश के डॉक्टर, नर्स और दूसरे स्वास्थ्य संबंधित स्टाफ। कोरोना की पहले लहर में जरूरी स्वास्थ्य संबंधित संसाधन के अभाव होते हुए भी देश के डॉक्टर ने हार नहीं मानी। दूसरी लहर में भी डट कर सामना किया , और दोनो ही लहरों में डॉक्टर, नर्स और हॉस्पिटल स्टाफ भी कोरोना के चपेट में आए, कइयों की तो कोरोना से जान चली गई, लेकिन फिर भी डॉक्टरों तथा अन्य हेल्थ वर्कर ने हार नहीं मानी। अब तीसरी लहर आने को है, देश अब तीसरी लहर के दहलीज पर खड़ा है, अब इस परिस्थितियों में 42 एमबीबीएस डॉक्टर और 47 नर्सों की पद खाली होने कई सवाल खड़े करता है ।

 

क्या हैं पूरा मामला ?

 

दरअसल प्रशासन बार बार यह दावा करता आ रहा है की वो तीसरी लहर से लड़ने की जरुरी तयारी लगभग कर ली है , लेकिन हर रोज इसमें कोई न कोई खामियां बाहर निकल कर सामने आ ही जाति है। अब ऐसे ही एक और खामी सामने आई हैं, जिसमे देखने को मिला है की 42 एमबीबीएस डाक्टरों की पद अभी तक खाली पड़ी है, और साथ में 47 नर्सों की भी पदो मे अभी तक किसी प्रकार की भर्ती नही की जा सकी है , ऐसे में सवाल उठता है जब डॉक्टर और नर्स ही नही रहेंगे तो इलाज कौन करेगा ।

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क्या कहता है प्रशासन ?

प्रशासन की ओर से यह कहना है की उसने दूसरी लहर के पहले कुल 45 एमबीबीएस डॉक्टरों की पदो के लिए नोटिफिकेशन दिया था जिसमे की सिर्फ तीन एमबीबीएस डॉक्टरों ने अप्लाई किया तथा बाकी बचे बयालिश पद रिक्त रह गए। उनके तरफ से यह भी कहा गया की दूसरे लहर के दौरान साठ आयु डॉक्टर तथा उंचालिश डेंटिस्ट को भर्ती में लिया गया है लेकिन एमबीबीएस डॉक्टरों के साथ अब नर्स की भी कमी देखने को मिल रही है । नर्सिंग स्टाफ की लिए कुल साठ वेकेंसी निकली गई थी जिसमे देखा गया की सिर्फ तेहराह ने अप्लाई किया है अर्थात् सैतालिश नर्सिंग स्टाफ के पद अब भी खाली है।

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स्वास्थ्य अधिकारी डा. बिंदु सिंघल ने कहा की स्वास्थ्य केंद्रों पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं हों, इसके लिए सभी केद्रों पर डाक्टर व सीएचओ की पोस्टिंग की जा चुकी है। अब वहां पर होने वाले कार्य की मानिटरिंग की जा रही है। केंद्र पर कितनी ओपीडी है, क्या जांच हो रही, किस तरह से कार्य हो रहा है। दवाएं उपलब्ध हैं अथवा नहीं। इस तरह से सभी स्वास्थ्य केंद्र अपना खुद मूल्यांकन करेंगे इसके बाद जिला स्तर की टीम इन केंद्रों का मूल्यांकन करेगी। कार्य के अनुरुप वहां पर बेहतर स्वास्थ्य सेंवाओं के लिए साधन संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

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