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तिघरा में हुई पानी की कमी, 10 करोड़ रुपए खर्च कर ककेटो-पेहसारी से लाया जायेगा पानी

ग्वालियर न्यूज, ग्वालियर डायरीज: ग्वालियर के तिघरा जलाशय में अब केवल अगले तीस दिनों तक के लिए पानी बचा है, और जो पानी अब बचा भी है वो किसी न किसी वजह से पीने के लिए उपयुक्त नहीं है। अगर बारिश नही हुई तो पानी की गहरी समस्या जन्म ले सकती है। पानी की समस्या को देखते हुए नगर नियम ने ककेटो बांध से पानी पंप के जरिए तिघरा जलाशय में लाने का निश्चय किया है।

तिघटा बांध
तिघरा जलाशय

क्या कर रही है प्रशासन

दरअसल चार वर्ष पहले 2017 में भी इसी तरह के हालात बने थे तब पानी को पंपों के जरिए लाया गया था जिसके दौरान अंठवान (58) पंपों का इस्तेमाल किया गया था। नगर नियम के आयुक्त शिवम वर्मा, निगम अधीक्षण यंत्री आरएलएस मौर्य, SDO जल संसाधन आरएल धाकड़, मोतीझील प्लांट के प्रभारी सतीशचंद्र श्रीवास्तव, आदि जल संसाधन और पीएचई के अफसरों ने मंगलवार के दिन ककेटो और पेहसारी बांध का निरीक्षण किया और अंत में यह फैसला लिया की ककेटो और पेहसारी बांध से पानी को पंपों के जरिए तिघरा जलाशय में लाया जाएगा। इसी सिलसले में जल संसाधन एवं प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट, पंद्रह जुलाई को अधिकारियों से बात करेंगे।

ककेटो बांध

कैसे लाया जायेगा पानी ?

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पानी ककेटो बांध से लाया जाएगा, ककेटो बांध में वर्तमान समय में मात्र 1400 MCF (मिलियन क्यूबिक फीट) पानी ही शेष बचा है। प्रशासन 1400 MCF पानी में से 800 MCF पानी डीवाटरिंग प्रक्रिया के मदद से नहर में छोड़ेगी। नहर के माध्यम से यह 800 MCF पानी पेहसारी लाया जायेगा। पेहसारी बांध में अभी के समय में 995 MCF पानी है जिसमे से लगभग 500 MCF पानी को तिघरा में छोड़ा जाएगा। कुल मिलाकर 1300 MCF पानी (800 MCF ककेटो तथा 500 MCF पेहसारी) तिघरा में लाया जायेगा, जो पुरे शहर की 100 दिनों की पानी की जरूरतों को पूरा करेगी इसके साथ ही आने वाले कुछ दिनों में अच्छे खासे बारिश का होना बेहद जरूरी है। पानी को पंपों को जरिए तिघरा जलाशय में लाने के लगभग दस करोड़ रुपए खर्च होंगे।

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तिघरा बांध

सांक नदी पर 105 वर्ष पहले 1916 में सिंधिया वंश के महाराजा माधौ ने तिघरा बांध का निमार्ण भारत रत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया से करवाया था । तिघरा पूरे ग्वालियर की प्यास बुझाता है और अगर इसमें सूखा पड़ गया तो शहर के अस्सी प्रतिशत लोगो तक पानी नहीं पहुंच पाएगा।

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